Campus Boom.
वीआर मीडिया एंड प्रोडक्शन एवं कैंपस बूम की ओर से आयोजित कैंपस समर इवेंट–2026 के तहत प्राप्त बच्चों की रचनाओं का विशेष प्रकाशन जारी है। इस श्रृंखला का उद्देश्य बच्चों की मौलिक सोच, संवेदनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति को उसी सहजता के साथ पाठकों तक पहुंचाना है, जैसी भाषा में उन्होंने अपनी भावनाओं को शब्द दिए हैं।
इस विशेष श्रृंखला में प्रस्तुत है विवेक विद्यालय के कक्षा चौथी के छात्र हर्ष कुमार की कविता। इस कविता के माध्यम से हर्ष ने आज के प्रतिस्पर्धा भरे जीवन को अपने शब्दों से उकेरने का प्रयास किया है. किस तरह से आज प्रतियोगिता हर क्षेत्र में है और बच्चें अंकों और आंकड़ों में उलझ कर रह जा रहे हैं.
जहाँ प्रतियोगिता हर फील्ड में
जहाँ प्रतियोगिता हर फील्ड में, क्लास में भी है,
वहाँ सच्ची मुस्कान ढूँढ़ना आज आसान नहीं है।
हर चेहरा हँसता है, मगर मन व्यथा छुपाए है,
हर जीत के पीछे कोई सपना रूठा हुआ है।
कभी वे बच्चे भी, जो किताबों से खिलते थे,
अब डरते हैं, जो रिपोर्ट कार्ड में मिलते हैं।
कलम अब रचनाओं के लिए नहीं चलती,
बस नंबरों की लड़ाई में उलझी रहती है।
माँ कहती है – “पहला आना ज़रूरी है”,
पर कोई नहीं पूछता – “क्या तू खुश है?”
हर बच्चे की आँखों में अब डर है,
कि कहीं कोई और आगे न निकल जाए।
क्लास के कोने में चुप बैठा बच्चा,
शायद वह भी बहुत कुछ कहना चाहता है।
पर इस शोर में उसकी आवाज़ खो जाती है,
क्योंकि यहाँ तो नंबरों से बच्चों को तौला जाता है।
हर टॉपर की तस्वीर अखबारों में छपती है,
पर वे बच्चे कहाँ जाते हैं, जो आख़िरी पायदान पर रहते हैं?
क्या उनके सपने कम रंगीन हैं?
या उनकी मेहनत बस अनदेखी-सी चीज़ है?
हर फील्ड, हर क्लास, हर बात में दौड़ है,
पर असली जीत तो तब है, जब दिल भी जुड़े हों।
क्योंकि अंक तो वक्त के साथ मिट जाते हैं,
पर इंसानियत के निशान जीवनभर साथ रहते हैं।
Name : Harsh kumar
Class : IV B
School : Vivek Vidyalaya


