Campus Boom.
वीआर मीडिया एंड प्रोडक्शन एवं कैंपस बूम की ओर से आयोजित कैंपस समर इवेंट–2026 के तहत प्राप्त बच्चों की रचनाओं का विशेष प्रकाशन शुरू किया जा रहा है। इस श्रृंखला का उद्देश्य बच्चों की मौलिक सोच, संवेदनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति को उसी सहजता के साथ पाठकों तक पहुंचाना है, जैसी भाषा में उन्होंने अपनी भावनाओं को शब्द दिए हैं।
प्रतियोगिता के आरंभ से ही कैंपस बूम का प्रयास रहा है कि बच्चों की रचनाओं को उनकी अपनी भाषा और शैली में स्थान मिले। इसी सोच के अनुरूप कविताओं की मूल भावना, अभिव्यक्ति और भाव-संरचना में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया गया है। केवल आवश्यक व्याकरणीय एवं वर्तनी संबंधी अशुद्धियों का परिमार्जन कर रचनाओं को प्रकाशन योग्य बनाया गया है। इस वर्ष की इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों की प्रवृष्टि आमंत्रित की गई थी। इस श्रृंखला में बच्चों के साथ साथ शिक्षकों की कविताएं पढ़ने को मिलेगी.
इस विशेष श्रृंखला की पहली कड़ी में प्रस्तुत है विवेक विद्यालय की कक्षा सातवीं की छात्रा भावना कुमारी की कविता। यह कविता मां के प्रति प्रेम, स्नेह, सम्मान और समर्पण की भावनाओं को बेहद सरल, निश्छल और मार्मिक शब्दों में व्यक्त करती है। बच्चों के कोमल मन से निकले ये भाव पाठकों को निश्चित रूप से भावुक और प्रेरित करेंगे।
तुम मेरी पहचान हो, मां
पूरी दुनिया एक तरफ और तुम्हारी ममता एक तरफ,
हर दर्द, हर सुख तुम्हारे साथ साझा हो।
तुम्हारे साथ बांटा दर्द भी यहां शांति और सुकून में बदल जाता है।
तुम्हारे बिना जीवन का हर हिस्सा अधूरा लगता है।
जैसे मोबाइल को बैटरी की जरूरत होती है,
वैसे ही मां, मुझे तुम्हारी जरूरत है।
जैसे मसालों के बिना व्यंजन अधूरा है,
वैसे ही मैं तुम्हारे बिना अधूरी हूं।
मेरा पहला कदम तुम्हारी गोद से शुरू होकर
तुम्हारे दिल में खत्म होता है।
तुम्हारे बिना जीवन का हर रास्ता अंधकारमय है,
तुम हो तो हर कठिन पल भी आसान लगता है।
तुम मेरी दोस्त हो, तुम मेरी ताकत हो,
तुम मानो भगवान का रूप हो।
तुम्हारा निस्वार्थ प्रेम मेरे जीवन के तूफान में सहारा है।
तुमने बिना कुछ मांगे मुझे कितना कुछ दिया है।
तुम्हारे प्रेम के बंधन में मैं बंधे रहना चाहती हूं,
जैसे पतंग से बंधी डोर।
तुम्हारा एहसान तो नहीं चुका पाऊंगी,
पर तुमने मुझ पर बहुत एहसान किए हैं।
बस कुछ दिल में था,
दबा एहसास आज मैंने कागज के पन्नों पर लिखा है।
तुम मेरी शुरुआत हो, तुम मेरी पहचान हो, मां।
तुम मेरी जरूरत हो, तुम मेरी आदत हो, मां।
Bhavna Kumari
Class – 7 B
School – Vivek Vidyalaya



