Campus Boom.
माँ: मेरी पहली पाठशाला
जब दुनिया के फॉर्मूले समझ नहीं आते,
जब न्यूटन के नियम भी फेल हो जाते,
तब माँ का आँचल ही थ्योरम बन जाता है,
जहाँ हर सवाल का हल मिल जाता है।
बोर्ड की रातों में जब नींद नहीं आती,
किताबों के ढेर में जब साँस अटक जाती,
तब तेरी हथेली की चाय की प्याली
सिलेबस से ज़्यादा हिम्मत दे जाती।
तूने सिखाया कि हार मानना नहीं,
‘Derivation’ गलत हो, तो फिर से करना सही।
मार्क्स कम आएँ, तो डाँट नहीं,
बस कहती है – “बेटा, कोशिश अभी बाकी है।”
कभी रिज़ल्ट के डर से काँपता हूँ मैं,
तेरी मुस्कान देखकर संभलता हूँ मैं।
दुनिया कहती है – “12वीं बहुत ज़रूरी है”,
माँ कहती है – “तू ज़रूरी है, बाकी सब धुरी है।”
तेरी उँगली पकड़कर चलना सीखा था,
आज अपने सपनों की ओर उड़ना सीखा है।
परवाह मत कर, माँ, मैं गिरूँगा नहीं,
क्योंकि तेरी दुआओं का पैराशूट हमेशा खुला है।
कॉलेज की दहलीज़ पर खड़ा हूँ अब मैं,
पर छोड़कर जाना सबसे मुश्किल तुझे ही है।
सुन, माँ, डिग्री तो मिल जाएगी,
पर तेरे जैसा ‘सब्जेक्ट’ फिर कहाँ मिलेगा?
तू मेरी पहली टीचर, आखिरी उम्मीद,
तेरे बिना हर सफलता भी अधूरी-सी लगती है।
12वीं पास हो जाऊँगा मैं एक दिन,
पर तेरी क्लास में ज़िंदगी भर फेल होना चाहता हूँ।
Name-Nandini Kumari
Class/Sec-12 B
School-Vivek Vidyalaya


