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साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था “फुरसत में” की ओर से जुलाई माह के अवसर पर शहर के ला ग्रविटी में एक आत्मीय मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था की संस्थापक आनंद बाला शर्मा ने की, जबकि संचालन डॉ. रागिनी भूषण एवं डॉ. मनीला कुमारी मानसी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का विषय प्रवेश डॉ. सरित किशोरी ने कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रागिनी भूषण ने संस्था की संस्थापक आनंद बाला शर्मा के साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए किया। इसके बाद वरिष्ठ साहित्यकार, गायिका, रंगकर्मी एवं समाजसेवी कृष्णा सिन्हा ने ग़ज़ल “मेरी तस्वीर में रंग और किसी का तो नहीं” की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्कृत एवं मानविकी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रागिनी भूषण ने “खबर क्या कि कब कारवां छोड़ देंगे” गीत प्रस्तुत कर जीवन की क्षणभंगुरता और यथार्थ को भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया।
वरिष्ठ साहित्यकार छाया प्रसाद ने अपनी कविता “तपती रेत हूँ मैं” के माध्यम से जीवन के संघर्ष और यथार्थ का सशक्त चित्रण किया। वहीं डॉ. मीनाक्षी कर्ण ने “तुम रूठोगी तो मनाएगा कौन?” शीर्षक संवेदनशील कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं की भावनाओं को स्पर्श किया।
डॉ. सरित किशोरी ने “भोर” कविता के माध्यम से नई शुरुआत और सकारात्मक सोच का संदेश दिया। डॉ. मनीला कुमारी मानसी ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता “है तुझको नमन” प्रस्तुत की, जबकि संस्था की संस्थापक आनंद बाला शर्मा ने “प्रकृति का सौंदर्य” कविता के माध्यम से प्रकृति संरक्षण और मानव की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान साहित्यसेवी एवं शिक्षिका साधना श्रीवास्तव ने प्रस्तुत रचनाओं का समीक्षात्मक विश्लेषण करते हुए कहा, “जब सुरों को शब्द मिलते हैं तो गीत बनते हैं और जब शब्दों को संवेदना मिलती है तो कविता और कहानी जन्म लेती है।” श्रोताओं के विशेष आग्रह पर डॉ. रागिनी भूषण ने “तुम्हारा गाँव कितनी दूर” तथा छाया प्रसाद ने “पलकें उठाकर” कविता की पुनः प्रस्तुति दी।
अंत में डॉ. मनीला कुमारी मानसी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। समारोह में आनंद बाला शर्मा, डॉ. सरित किशोरी, छाया प्रसाद, डॉ. रागिनी भूषण, कृष्णा सिन्हा, डॉ. मीनाक्षी कर्ण, डॉ. मनीला कुमारी मानसी एवं साधना श्रीवास्तव सहित सभी सदस्य उपस्थित रहीं। कार्यक्रम साहित्य, संगीत और संवेदनाओं के सुंदर संगम के रूप में संपन्न हुआ।


