आगे बढ़ते चलो
संगमित्रा बसु पाल
शिक्षिका, केरला पब्लिक स्कूल, बर्मामाइंस
यही ज़िंदगी है, ऐ ज़िंदगी,
तू कभी मुड़कर मत देखना।
बीते लम्हों की धूल झाड़कर,
बस आगे ही आगे बढ़ना।
नदियों के जैसे बहते रहना,
रुकना तेरा काम नहीं,
पत्थर आएँ राहों में चाहे,
मुड़ जाना तेरा नाम नहीं।
समुद्र की लहरों सी बनकर,
हर पल आगे आती रह,
उतार-चढ़ाव के इस खेल में,
खुद को और सिखाती रह।
तूफ़ानों से डरना कैसा,
ये तो तेरी पहचान हैं,
हर गिरावट के बाद उठ जाना,
यही तेरे अरमान हैं।
पंछी बन तू उड़ती जा,
आसमान को छूती जा,
झुकना तेरी फितरत नहीं,
अपने हौसले बुनती जा।
आगे एक विशाल समंदर है,
खुला हुआ आकाश है,
हिम्मत को अपना साथी बना,
हर सपना तेरे पास है।
तो चल ऐ ज़िंदगी, थमना नहीं,
हर पल खुद को गढ़ते चलो,
जो भी आए राह में तेरे,
मुस्कुराकर बढ़ते चलो।


