डॉ. बिनीता पाणिग्रही.
विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस के अवसर पर टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) की एचओडी, इमरजेंसी मेडिसिन डॉ. बिनीता पाणिग्रही ने कहा कि किसी भी अस्पताल का इमरजेंसी डिपार्टमेंट (ईडी) मरीजों के लिए पहला संपर्क बिंदु होता है और इसे अस्पताल का “हृदय” कहा जाता है। यह विभाग 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन कार्यरत रहकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर चोट, श्वसन संबंधी समस्याओं और सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थितियों में मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराता है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में होने वाले लगभग आधे भर्ती मामलों में इमरजेंसी डॉक्टर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की भूमिका निभाते हैं। आपदाओं, महामारी और जनस्वास्थ्य आपात स्थितियों में भी इमरजेंसी डिपार्टमेंट सबसे पहली प्रतिक्रिया देने वाली इकाई के रूप में कार्य करता है।
प्रतिवर्ष 27 मई को मनाया जाने वाला विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य अस्पतालों के इमरजेंसी डिपार्टमेंट की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। वर्ष 2026 की थीम “सेफ स्पेस फॉर इमरजेंसी मेडिसिन टीम्स – स्टॉप वायलेंस एवरीवेयर” स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करती है।
डॉ. पाणिग्रही ने कहा कि इमरजेंसी डिपार्टमेंट संकट की घड़ी में मरीजों और उनके परिजनों के लिए सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन अत्यधिक तनाव, भावनात्मक दबाव और अस्पतालों में बढ़ती भीड़ के कारण स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित कार्य वातावरण, चिकित्सा कर्मियों के प्रति सम्मान और किसी भी प्रकार की हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता समय की मांग है।
उन्होंने बताया कि आपातकालीन चिकित्सा आज चिकित्सा विज्ञान की एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञता बन चुकी है। भारत में वर्ष 1995 से इसे विशेष चिकित्सा शाखा के रूप में विकसित किया गया, जिसमें ट्रॉमा केयर, क्रिटिकल केयर, टॉक्सिकोलॉजी, रेससिटेशन और आपातकालीन प्रक्रियाओं का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
डॉ. पाणिग्रही ने कहा कि अस्पतालों में बढ़ती भीड़, सीमित संसाधन और लगातार बढ़ते मरीजों का दबाव स्वास्थ्यकर्मियों में तनाव और बर्नआउट की समस्या को बढ़ा रहा है। इसके साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ मौखिक दुर्व्यवहार से लेकर शारीरिक हमलों तक की घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि भारत में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) सहित विभिन्न कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान लागू महामारी रोग (संशोधन) अधिनियम, 2020 के तहत स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित किया गया है।
टाटा मेन हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यहां एक समर्पित और दक्ष टीम 24×7 गंभीर मरीजों के उपचार के लिए उपलब्ध रहती है। विभाग में मेडिकल ऑफिसर्स, इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन, जनरल सर्जन और अन्य विभागों के विशेषज्ञ लगातार सेवाएं प्रदान करते हैं। विभाग प्रतिदिन 200 से अधिक मरीजों का इलाज करता है, जबकि विशेष परिस्थितियों में यह संख्या 500 तक पहुंच जाती है।
उन्होंने कहा कि विभाग को हर समय आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रखने हेतु नियमित प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं। साथ ही सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कठोर क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम भी संचालित किया जाता है।
विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस के अवसर पर डॉ. पाणिग्रही ने सभी आपातकालीन चिकित्सा पेशेवरों के समर्पण और सेवाभाव को नमन करते हुए कहा कि सुरक्षित कार्य वातावरण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं ही एक मजबूत, संवेदनशील और भरोसेमंद स्वास्थ्य प्रणाली की आधारशिला हैं।


