Manoj Kishor.
15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का वह गौरवपूर्ण दिन था, जब देश ने लगभग दो शताब्दियों के ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की। हर वर्ष हम इस दिन तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हैं। लेकिन आजादी के उस ऐतिहासिक दौर से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं, जिन्हें विद्यार्थियों को जरूर जानना चाहिए।
आजादी की पहली सुबह और लाल किला
आज स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। हालांकि 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा नहीं फहराया था। उन्होंने 15 अगस्त को दिल्ली में कई कार्यक्रमों में भाग लिया और बाद में 16 अगस्त 1947 को लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। लाल किले से प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण की परंपरा इसके बाद निरंतर चली।
आजादी के समय भारत का राष्ट्रगान कौन था?
15 अगस्त 1947 को भारत का कोई आधिकारिक राष्ट्रगान नहीं था। ‘जन गण मन’ को 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया। हालांकि रवींद्रनाथ ठाकुर की यह रचना स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में ही व्यापक रूप से लोकप्रिय हो चुकी थी। 
‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ भाषण कब हुआ?
पंडित जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ यानी ‘नियति से वादा’ 14 अगस्त 1947 की रात संविधान सभा के विशेष सत्र में दिया गया। आधी रात को भारत के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी पूरा देश बना। यह भाषण भारतीय स्वतंत्रता के सबसे यादगार भाषणों में गिना जाता है।
महात्मा गांधी आजादी के जश्न में दिल्ली में नहीं थे
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन 15 अगस्त 1947 को वे दिल्ली में स्वतंत्रता समारोह में शामिल नहीं हुए। उस समय वे बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा के बीच शांति स्थापित करने के प्रयास में जुटे थे। उन्होंने लोगों के बीच भाईचारा और शांति कायम करने को प्राथमिकता दी।
15 अगस्त की तारीख क्यों चुनी गई?
भारत को सत्ता हस्तांतरण की तारीख के रूप में 15 अगस्त 1947 चुनी गई। तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने बाद में बताया था कि 15 अगस्त उनके लिए विशेष महत्व रखता था, क्योंकि 15 अगस्त 1945 को जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसलिए इस तारीख को उनके लिए शुभ माना जाता था।
आजादी के समय भारत-पाकिस्तान की सीमा स्पष्ट नहीं थी
भारत की स्वतंत्रता के समय भारत और पाकिस्तान के बीच नई सीमा का अंतिम सार्वजनिक ऐलान नहीं हुआ था। रेडक्लिफ रेखा के आधार पर सीमा निर्धारण किया गया और इसका आधिकारिक प्रकाशन 17 अगस्त 1947, यानी स्वतंत्रता के दो दिन बाद हुआ। इस कारण आजादी के समय कई लोगों को यह स्पष्ट रूप से पता भी नहीं था कि उनके गांव या शहर किस देश का हिस्सा बनेंगे।
क्या 1947 में एक रुपया एक डॉलर के बराबर था?
यह दावा अक्सर सुनने को मिलता है कि 1947 में एक भारतीय रुपया एक अमेरिकी डॉलर के बराबर था, लेकिन इसे सीधे वर्तमान विनिमय दर की तरह समझना सही नहीं है। उस समय भारत की मुद्रा व्यवस्था और ब्रिटिश पाउंड से उसका संबंध अलग था। इसलिए विद्यार्थियों को इस तथ्य को सावधानी से समझना चाहिए और इसे ‘एक रुपया बराबर एक डॉलर’ के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
15 अगस्त को अन्य देशों की स्वतंत्रता भी जुड़ी है
15 अगस्त का दिन केवल भारत के इतिहास में ही महत्वपूर्ण नहीं है। दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया भी 15 अगस्त को जापानी शासन से मुक्ति की वर्षगांठ मनाते हैं। हालांकि अलग-अलग देशों में इस दिन का ऐतिहासिक संदर्भ और स्वरूप अलग है।
आजादी सिर्फ एक तारीख नहीं
15 अगस्त केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान की कहानी है। आजादी हमें केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की जिम्मेदारी भी देती है।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम अपने इतिहास को जानें, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करें तथा एक बेहतर, शिक्षित, वैज्ञानिक और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लें।



