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मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर प्रगतिशील लेखक संघ, जमशेदपुर, जनवादी लेखक संघ, सिंहभूम, जन सांस्कृतिक मंच, जमशेदपुर तथा भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा), जमशेदपुर के संयुक्त तत्वावधान में “प्रेमचंद और आज के समय से संवाद” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों और प्रगतिशील चिंतकों ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का संचालन वरुण प्रभात ने किया। अध्यक्ष मंडल में प्रो. अहमद बद्र, शैलेन्द्र अस्थाना, अर्पिता एवं सुधीर सुमन उपस्थित रहे। विषय प्रवेश करते हुए शशि कुमार ने प्रेमचंद के साहित्य की वैचारिक विरासत, उनकी जनपक्षधर दृष्टि तथा वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
गोष्ठी में सौरभ अस्थाना, संजय सोलोमन, अजय महताब, अर्पिता, कृपाशंकर, सुधीर सुमन, शैलेन्द्र अस्थाना तथा प्रो. अहमद बद्र ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अपने समय का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आज के समाज को समझने और उसके अंतर्विरोधों से संवाद करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने प्रेमचंद की जनपक्षधरता, साहित्य और समाज के जीवंत संबंधों तथा वर्तमान समय में उनके विचारों और रचनाओं की निरंतर बनी हुई प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बढ़ती सामाजिक विषमता, सांप्रदायिकता, बाज़ारवाद और मानवीय मूल्यों के संकट के दौर में प्रेमचंद के साहित्य को अधिक गंभीरता से पढ़ने और समझने की आवश्यकता है। उनका साहित्य आज भी समाज को संवेदनशील, न्यायपूर्ण और मानवीय दृष्टि प्रदान करता है।
कार्यक्रम के दौरान इप्टा के कलाकारों ने जनगीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर गोष्ठी को सांस्कृतिक ऊर्जा प्रदान की। अंत में नियाज़ अख़्तर ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विनय कुमार, राम कविंदर, राजदेव सिन्हा, चंद्रकांत, गौहर अज़ीज़, रिज़वान रंगाबादी, डॉ. प्रियंका सिंह, शोभा देवी, अंजना सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी एवं प्रगतिशील साथी उपस्थित रहे।


