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भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रांची ने प्रबंधन और सामाजिक विज्ञान के शोध को नई दिशा देने के लिए रिसर्च मेथड्स ग्रुप (आरएमजी) की शुरुआत की है। यह पहल शोध पद्धति को मजबूत बनाने और विभिन्न विषयों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
संस्थान के अनुसार सामाजिक विज्ञान में मजबूत शोध के लिए सुदृढ़ पद्धति की आवश्यकता होती है। वर्तमान शैक्षणिक व्यवस्था में शोध पद्धति का प्रशिक्षण अक्सर अलग-अलग विषयों में बंटा हुआ रहता है, जिससे अंतर्विषयी शोध की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। ऐसे में आरएमजी को देश के पहले समर्पित क्रॉस-डिसिप्लिनरी मंच के रूप में विकसित किया गया है, जहां शोधकर्ता प्रशिक्षण, नवाचार, सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक साझा मंच प्राप्त करेंगे।
आरएमजी के माध्यम से शोधार्थियों, फैकल्टी और प्रतिभागियों को उनके शैक्षणिक शोध कार्यों में लगातार मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी क्रम में “थिंकिंग विद थ्योरी” श्रृंखला शुरू की गई है, जिसमें पीएचडी शोधार्थी, फैकल्टी और विषय विशेषज्ञ अपने शोध कार्य और उससे जुड़े सिद्धांतों पर चर्चा करते हैं। अब तक इस श्रृंखला के 10 सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं, जिससे शोधार्थियों में आलोचनात्मक सोच और शोध पद्धति की समझ विकसित हो रही है।
इसी कड़ी में हाल ही में आरएमजी द्वारा हर्मेन्यूटिक रिसर्च मेथड पर पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का संचालन प्रोफेसर अजीत एन. माथुर और प्रोफेसर सारी मटिला ने किया, जिसमें फैकल्टी सदस्य, डॉक्टोरल स्कॉलर्स और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य जटिल प्रबंधकीय और नीतिगत चुनौतियों के समाधान के लिए उन्नत व्याख्यात्मक शोध पद्धतियों की समझ विकसित करना था।
आरएमजी का लक्ष्य शोध क्षमता निर्माण और नेटवर्क विकास के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करना है। इसके तहत शोध पद्धति के तीन प्रमुख आयामों पर कार्य किया जा रहा है, जिनमें दार्शनिक आधार, पद्धतियों का एकीकरण और विश्लेषणात्मक क्षमताओं का विकास शामिल है। इसमें सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर, गुणात्मक विश्लेषण प्लेटफॉर्म, स्पेशल और नेटवर्क विश्लेषण, टेक्स्ट माइनिंग, बिब्लियोमेट्रिक्स और कम्प्यूटेशनल पद्धतियों को भी शामिल किया गया है।
इसके अलावा उन्नत शोध पद्धतियों पर कार्यशालाएं, रिसर्च डिजाइन क्लीनिक, स्पीकर सीरीज, शिक्षण सामग्री का विकास, सहयोगी शोध परियोजनाएं और उभरती शोध विधियों पर सम्मेलन भी आयोजित किए जाएंगे।
आरएमजी के चेयरपर्सन प्रो. कुशाग्र शरण ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य शोध के प्रति उत्साह को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से वैश्विक स्तर पर शोध पद्धति के विकास में नेतृत्व करना और भारत में राष्ट्रीय स्तर का मेथड्स ट्रेनिंग नेटवर्क स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि आरएमजी का लक्ष्य इसे एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के केंद्र के रूप में विकसित करना है, जहां से जटिल सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों पर शोध के लिए नई पद्धतियां विकसित की जा सकें।

