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जनवादी लेखक संघ सिंहभूम इकाई ने भोजपुरी भवन गोलमुरी में रेड बुक्स डे एवं अन्तराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रुप में मनाया गया। इस अवसर पर साम्राज्यवाद बनाम राष्ट्रवाद विषय पर विमर्श किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत काशीनाथ प्रजापति ने ‘तु जिंदा है तो जिन्दगी के जीत पर यकीन कर, अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला जमीं पर’ गीत से की।विषय प्रवेश कराते हुए वरुण प्रभात ने कहा कि साम्राज्यवाद बनाम राष्ट्रवाद का प्रश्न केवल राजनीतिक विमर्श नहीं ब्लिक हमारे समय का नैतिक प्रश्न है। हमें यह निर्णय लेना होगा कि हम वैश्विक पूंजी और सांस्कृतिक वर्चस्व के आगे आत्मसमर्पण करेंगे, या जनवादी राष्ट्रवाद की उस राह पर चलेंगे जो समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को पुनर्स्थापित करती है?
अपनी बात रखते हुए सीयाशरण शर्मा ने कहा कि साम्राज्यवाद और राष्ट्रवाद ये दोनों एक दूसरे के विरोधी रहे हैं लेकिन आज की तारीख में राष्ट्रवाद का जो स्वरुप देखने को मिल रहा है वह लोकतांत्रिक पद्धति को खोखला कर रहा है और भीतर ही भीतर साम्राज्यवाद का हितैषी है। डां राम कविन्द्र ने फिलिस्तीन, वेनेजुएला, युक्रेन का उदाहरण देते हुए साम्राज्यवाद की सूरसा भूख पर प्रकाश डाला। शशी कुमार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि दुनिया के साम्राज्यवादियों ने अमेरिका के नेतृत्व में पुरी दुनिया की संपदा को लूटने का अभियान छेड़ दिया है। लोकतांत्रिक देशों और सामाजवादी चिन्तकों को इस साजिश को समझना होगा और इसके विरुद्ध इंकलाब की आवाज को बुलंद करना होगा।
लिटिल इप्टा के बच्चों ने संजय सोलोमन रचित गीत ‘चलो की आज अपने सारे बंधनों को तोड़ दे ‘ की प्रस्तुति वाद्य यंत्रों के साथ दी। डीएनएस आनंद ने रेड बुक्स डे की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि जितने भी दर्शन हुए है उसमें मार्क्सवादी दर्शन ही विज्ञान की दृष्टि लिए हुए है। इसलिए जरुरी है इंकलाबी किताबों को पढ़ना और उसका अनुसरण करना।
मुख्य वक्ता डॉ सुभाष चंद्र गुप्त ने अपने व्यक्त्व्य में कहा कि 21वीं सदी में भी यातना शिविरों का बना होना इस बात का प्रमाण है कि आज भी नाजीवाद, फासीवाद और उपनिवेशवाद अपने बदले स्वरुप में हमारे सामने है। एक तरफ विश्व ग्राम की बात हो रही है और दूसरी तरफ चयनित राष्ट्राध्यक्ष को रातोंरात उठा लिया जाता है। किसी भी सत्ता को समझने के लिए उसकी नीतियाँ कैसी है, यह देखने की जरूरत नहीं है, जरुरत है उन नीतियों की दिशा को देखना।
कार्यक्रम को शैलेन्द्र अस्थाना ने भी संबोधित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए अशोक शुभदर्शी ने कहा कि आज की जो परिस्थिति है उसमें चेतना का विकास सबसे महत्वपूर्ण है। चेतना जब विकसित होगी तब मनुष्य मुक्कमल मनुष्य होगा और एक मुक्कमल मनुष्य ही समाजवाद का निर्माण कर सकता।
इस अवसर पर राजदेव सिन्हा, दिव्या, निशांत सिंह, सौरभ अस्थाना, संजय सोलोमन, संदीप सिंह गौतम ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम का समापन फैज की रचना’हम देखेंगे ‘ गीत से की गई। जिसकी प्रस्तुति रमण ने दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक शुभदर्शी ने की। संचालन सतीश कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन देवाशीष मुखर्जी ने दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में विनय कुमार, अर्पिता,दामोदर प्रजापति, साहिल नाग, अभिषेक नाग, गुंजन नाग, सरवन नाग, कल्याणी दीप, नमीता नाग, सुजल, अजय कुमार दास, दिव्या हरपाल, सुरभी हरपाल, ध्रुव कुमार आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

