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जमशेदपुर सिटीजंस फोरम (जेसीएफ) की ओर से माइकल जॉन सभागार में विशेष कजरी गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध लोक गायिका एवं पद्मश्री सम्मानित उर्मिला श्रीवास्तव ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में शहर के विभिन्न वर्गों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और लोक संगीत की समृद्ध परंपरा का आनंद लिया।
कजरी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और अवध क्षेत्र की प्रसिद्ध लोक गायन शैली है, जिसका विशेष संबंध वर्षा ऋतु और सावन से माना जाता है। कजरी के माध्यम से विरह, प्रेम, प्रकृति के सौंदर्य और सावन की फुहारों के उल्लास को संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद जेसीएफ के अध्यक्ष ए.के. श्रीवास्तव ने कजरी गायन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसकी विशेषताओं पर संक्षिप्त जानकारी दी।
इसके बाद पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव ने अपनी समृद्ध और सधे हुए गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों में सावन की उमंग, लोक जीवन की संवेदनाएं और कजरी की पारंपरिक मिठास का सुंदर समावेश देखने को मिला।
सांगीतिक प्रस्तुति में सह-गायिका शैला श्रीवास्तव, हारमोनियम पर प्रवीण कुमार, शहनाई पर बांकेलाल, बैंजो पर सियाराम, ढोलक पर पंचम जी और नाल पर पप्पू लाल ने संगत प्रदान की।
कार्यक्रम का संचालन जेसीएफ के संरक्षक कमल किशोर ने किया। वहीं संयुक्त महासचिव कमांडर संजीव रमन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कलाकारों, अतिथियों और कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
कायस्थ समाज की महिलाओं से की आत्मीय मुलाकात
जमशेदपुर प्रवास के अगले दिन पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव ने सोनारी स्थित अखिल भारतीय कायस्थ समाज का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने समाज की महिलाओं से आत्मीय बातचीत की और लोक संस्कृति एवं पारंपरिक कलाओं को जीवंत बनाए रखने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।


