Campus Boom.
सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर ने दुर्लभ मृदा (रेयर अर्थ) तत्वों की सतत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए रायपुर स्थित अर्थ इंडियन रिसोर्सेज लिमिटेड के साथ मैग्नेट रीसाइक्लिंग प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण (Technology Transfer) के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए।
यह पहल भारत सरकार के राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के उद्देश्यों को गति प्रदान करेगी। इसके माध्यम से स्क्रैप मैग्नेट से नियोडिमियम (Nd), प्रसीओडिमियम (Pr) तथा अन्य मूल्यवान रेयर अर्थ तत्वों की पुनर्प्राप्ति कर देश में इन महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सीएसआईआर-एनएमएल द्वारा विकसित यह प्रौद्योगिकी एनडीएफईबी (NdFeB) मैग्नेट स्क्रैप से उच्च शुद्धता वाले रेयर अर्थ ऑक्साइड की ऊर्जा-कुशल पुनर्प्राप्ति पर आधारित है। इसका उपयोग पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रिक वाहन तथा विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में प्रयुक्त जीवन-चक्र पूर्ण कर चुके (End-of-Life) मैग्नेटों के पुनर्चक्रण में किया जा सकेगा। इससे नियोडिमियम, प्रसीओडिमियम तथा डिस्प्रोसियम जैसे बहुमूल्य रेयर अर्थ तत्वों का पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ तरीके से पुनः उपयोग संभव होगा।
इस तकनीक की विशेषता यह है कि इसमें कम ऊर्जा खपत वाली ऊष्मीय उपचार (थर्मल ट्रीटमेंट) प्रक्रिया के बाद जल लीचिंग (वाटर लीचिंग) तकनीक अपनाई जाती है, जिससे प्रबल खनिज अम्लों के उपयोग की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान आयरन ऑक्साइड भी एक मूल्यवान सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है, जिससे इसकी औद्योगिक उपयोगिता और बढ़ जाती है।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समारोह में अर्थ इंडियन रिसोर्सेज लिमिटेड, रायपुर की ओर से ऋषि राज नारंग, योगेन्द्र नारंग एवं दुष्यंत दास उपस्थित रहे। वहीं सीएसआईआर-एनएमएल की ओर से डॉ. एस. शिवप्रसाद, डॉ. एस. के. पाल, डॉ. के. के. साहू, डॉ. अभिलाष, डॉ. नवनीत सिंह रंधावा, डॉ. प्रतिमा मेश्राम, डॉ. वाई. उषा, डॉ. उदय भास्कर राव तथा डॉ. बीना कुमारी उपस्थित थीं।
इस प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण से देश में रेयर अर्थ तत्वों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिलेगा, आयात पर निर्भरता कम होगी तथा हरित एवं आत्मनिर्भर औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।


