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एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (एसीएसआईआर)-एनएमएल साइंस क्लब के तत्वावधान में सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर के सहयोग से शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक करियर को दिशा देने तथा भावी शोधकर्ताओं के निर्माण में शिक्षकों एवं मार्गदर्शकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना था।
शोध संस्कृति के निर्माण में मेंटरशिप महत्वपूर्ण
कार्यक्रम में सीएसआईआर-एनएमएल के पूर्व निदेशक डॉ. एस. श्रीकांत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनका स्वागत करते हुए सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने सशक्त शोध संस्कृति के निर्माण में मार्गदर्शन और मेंटरशिप के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, एसीएसआईआर-एनएमएल के समन्वयक डॉ. वी. राजिनीकांत ने उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान को आगे बढ़ाने में एसीएसआईआर की भूमिका को रेखांकित किया।
एसीएसआईआर-एनएमएल के शुरुआती दौर को किया याद
अपने संबोधन में डॉ. एस. श्रीकांत ने सीएसआईआर-एनएमएल में एसीएसआईआर के प्रारंभिक वर्षों और इसके क्रमिक विकास को याद किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की स्थापना के दौरान कई चुनौतियां सामने आई थीं। वैज्ञानिकों, शिक्षकों और उद्योग जगत के सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों से एसीएसआईआर-एनएमएल के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ।
उन्होंने बताया कि एसीएसआईआर-एनएमएल से शिक्षा प्राप्त करने वाले कई शोधार्थी आगे चलकर प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक पदों पर पहुंचे हैं। उन्होंने प्रयोगशाला स्तर पर कार्यक्रम की निरंतर समीक्षा तथा समय की आवश्यकताओं के अनुरूप सुधार और नवाचार पर जोर दिया, ताकि सीएसआईआर-एनएमएल सामग्री अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए पसंदीदा संस्थान बना रहे।
एआई के दौर में भी शिक्षक की भूमिका अहम
डॉ. श्रीकांत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में शिक्षण और अधिगम के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि एआई शिक्षा के पारंपरिक तरीकों में व्यापक बदलाव ला रहा है, लेकिन ऐसा प्रेरणादायी शिक्षक, जो स्पष्टता, नवाचार और विद्यार्थियों में जिज्ञासा पैदा करने की क्षमता रखता हो, हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा।
उन्होंने अपने तीन उत्कृष्ट शिक्षकों—प्रो. राजेश प्रसाद, प्रो. पी. रामचंद्र राव और प्रो. टी. आर. अनंतरामन—को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने बताया कि उनके शिक्षण, नवाचार और मार्गदर्शन की विशिष्ट शैली का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
“महान शिक्षक महान विद्यार्थियों का निर्माण करता है”
युवा शोधार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. श्रीकांत ने कहा, “एक महान शिक्षक वही है जो महान विद्यार्थियों का निर्माण करता है।” उन्होंने शोधार्थियों से अपने शिक्षकों से मिले ज्ञान और मार्गदर्शन को आगे बढ़ाने तथा वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवाचार की भावना को बनाए रखने का आह्वान किया।
स्मृति-चिह्न देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने डॉ. एस. श्रीकांत को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। समारोह ने शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन, जिज्ञासा, नवाचार तथा अपने शिक्षकों की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पर विचार करने का अवसर प्रदान किया।
पूर्व निदेशकों के साथ शोधार्थियों का संवाद
कार्यक्रम की विशेषता अपराह्न में आयोजित संवादात्मक सत्र रहा। इसमें सीएसआईआर-एनएमएल के दो पूर्व निदेशक डॉ. एस. श्रीकांत और डॉ. आई. चट्टोराज ने एसीएसआईआर के शोधार्थियों के साथ संवाद किया। शोधार्थियों ने पूर्व निदेशकों के समक्ष अपने प्रश्न रखे और वैज्ञानिक अनुसंधान, नेतृत्व तथा करियर विकास से जुड़े उनके अनुभवों एवं दृष्टिकोण को जाना।





