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जमशेदपुर की प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठन सीड्स ने अपनी 30वीं वार्षिक आमसभा का आयोजन रुचि नरेंद्रन की अध्यक्षता में किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्ष 1995 में न्याय और समता की प्रतिबद्धता से शुरू हुआ यह प्रयास आज एक सशक्त आंदोलन बन चुका है। करुणा, कर्म और सकारात्मक परिवर्तन में विश्वास ही सीड्स की पहचान है। इन तीन दशकों में संगठन ने अनेक समुदायों के साथ मिलकर कार्य किया है, जिनका साझा उद्देश्य सम्मान, समावेश और अवसर की खोज रहा है।
रुचि नरेंद्रन ने कहा कि सीड्स ने दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ लैंगिक हिंसा जैसी कठोर चुनौतियों का सामना किया है। हर पीड़ित की आवाज को समर्थन और हर चुप्पी को वकालत के जरिए तोड़ना इसका संकल्प रहा है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षित और प्रेरणादायी माहौल उपलब्ध कराना, साथ ही कौशल विकास और आजीविका संवर्धन भी संगठन के कार्यों का अहम हिस्सा है।
संगठन की सचिव डॉ शुभ्रा द्विवेदी ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि सीड्स ने झारखंड के पाँच जिलों के लगभग 728 गाँवों और बस्तियों’ तक पहुँच बनाई है और संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों में से 11 का समर्थन किया है। गरीबी उन्मूलन योजनाओं के अंतर्गत अब तक 124 गाँवों से 10,000 से अधिक आवेदन जमा करवाए गए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन योजनाएँ, किसान सम्मान निधि और मातृवंदना योजना प्रमुख हैं।
संगठन द्वारा संचालित 41 बाल मंडलों’ से 1200 से अधिक बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सीड्स ने इस वर्ष 792 लैंगिक हिंसा के मामले दर्ज किए, जिनमें से 64 प्रतिशत से अधिक का समाधान हो चुका है। पिछले पाँच वर्षों में संगठन ने 7600 मामलों को दर्ज कर कार्रवाई की है। बैठक में बोर्ड सदस्य फादर ई. ऑगस्टिन, टीना बोधनवाला, रोनाल्ड डीकोस्टा, डॉ. रश्ने टाटा, डॉ. पुष्पा तिवारी, जगबंधु सांडा, देविका सिंह और संजना पात्रो उपस्थित थे।